
आज राज्य में हरेला पर्व के अवसर पर जगह-जगह वृक्षारोपण कार्यक्रम किया गया। सरकार की ओर से आज राज्य में सरकारी अवकाश घोषित किया था। तथा हरेला पर्व पर दस लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा। खुद मुख्यमंत्री ने जागेश्वर धाम में वृक्षारोपण कार्यक्रम में शामिल हुए और पौधारोपण किया।इस अवसर पर उन्होंने प्रकृति को हरा-भरा बनाये रखने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक पौधा मां के नाम संकल्प’ को दोहराते हुए कहा कि पर्संयावरण संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है। हरेला पर्व पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत,समेत कई बड़े नताओं ने प्रदेश की जनता को शुभकामनाएं संदेश दिया।

‘रेला’ या ‘हरेला’ उत्तराखंड का कृषि और पर्यावरण-अनुकूल के लोक पर्व है। यह त्योहार प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और मानसून के स्वागत का प्रतीक है।यह पर्व हरियाली और समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है। मानसून के आगमन पर, धरती के हरे-भरे होने की खुशी में यह त्योहार मुख्य रूप से उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों में मनाया जाता है। कुमाऊं में हरेला आने से 9 या 10 दिन पहले घर के पूजा स्थल पर एक टोकरी या मिट्टी के बर्तन में 5, 7 या 9 प्रकार के अनाज (जैसे- धान, गेहूं, जौ, गहत, भट्ट आदि) बोए जाते हैं।पूजा और आशीर्वाद: त्योहार के दिन इन हरे-भरे छोटे पौधों (जिन्हें ‘हरेला’ कहा जाता है) की पूजा की जाती है। इन्हें भगवान को अर्पित करने के बाद, घर के बुजुर्ग बच्चों और परिवार के सदस्यों के सिर या कानों के पीछे आशीर्वाद के रूप में रखते हैं।इस खास मौके पर ‘स्वाले’ और ‘भूरी’ (उड़द दाल की पकौड़ी) जैसे पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन बनाए जाते हैं।पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण पिछले कुछ वर्षों में हरेला पर्व पर्यावरण चेतना के प्रतीक के रूप में उभरा है। अब इस दिन लोग केवल घरों में ही हरेला नहीं उगाते, बल्कि सामूहिक रूप से वृक्षारोपण करके पर्यावरण को बचाने का संदेश भी दे रहे हैं । यह पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने और उसके संरक्षण का एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। हरेला के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2020 से इसे सार्वजनिक अवकाश घोषित करके राज्य भर में वृहद स्तर पर वृक्षारोपण अभियान का मुख्य दिन बना दिया है। आज इस पर्व के तहत राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में 10 लाख पौधे लगाने का महाअभियान शुरू किया है। । सरकार ने इस मुख्य उत्सव को अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम में आयोजित किया। जहां सीएम धामी खुद शामिल हुए हैं।’एक पेड़ मां के नाम’ अभियान। इस बार इस थीम के तहत उत्तरकाशी, चमोली और देहरादून सहित कई जिलों में व्यापक पौधारोपण किया गया । देहरादून जिले में रजत जयंती वर्ष के मौके पर महीने भर में 15.5 लाख पौधे लगाने का बड़ा लक्ष्य है।इस विशेष त्योहार के मौके पर उत्तराखंड सरकार ने आज प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है, जिससे सभी सरकारी स्कूल और कॉलेज बंद रहे ।

डोईवाला विधानसभा में विधायक बृजभूषण गैरोला ने हरेला पर्व के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में पौधारोपण कार्यक्रम में शामिल हुए।इस दौरान उन्होंने पर्यावरण के प्रति जागरूक होने की अपील की । विधायक गैरोला ने कहा कि उत्तराखंड के लोग पर्यावरण प्रेमी रहे हैं। यह चिपको आंदोलन की धरती है और यहां के लोग देश-विदेश में पर्यावरण के प्रति कितने जागरूक हैं यह बताने की आवश्यकता नहीं है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं हरित उत्तराखंड के संकल्प को सशक्त बनाने के लिए वृक्षारोपण कर उनके संरक्षण की भी जिम्मेदारी हम सबकी होनी चाहिए। इस अवसर पर डोईवाला के नगर पालिका अध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी भाजपा के जिलाध्यक्ष राजेंद्र तड़ियाल, उप जिलाधिकारी अर्पणा ढौंडियाल, विक्रम नेगी, पंकज शर्मा, राकेश डोभाल, अरुण सोलंकी, ईश्वर रौथाण, आदि मौजूद रहे । भोपाल पाणी और दुधली क्षेत्र में भी विधायक गैरोला के साथ सैकड़ों लोगों ने पौधारोपण किया।

नगरनिगम कार्यालय में भी महापौर सौरभ थपलियाल, पार्षदगण और कर्मचारियों ने वृक्षारोपण किया।
उधर मसूरी विधानसभा में पूर्व महापौर सुनील उनियाल गामा ने भी कई जगह वृक्षारोपण कार्यक्रमों में प्रतिभाग किया । और वृक्षारोपण कर लोगों से पर्यावरण के प्रति जागरूक होने की अपील की।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महापौर रहते हमने ‘स्वच्छ दून, सुंदर दून’ का जो संकल्प लिया था और दूनवासियों से अपील की थी जिसका दूनवासियों ने सहयोग किया। उसको लेकर उन्होंने दूनवासियों का आभार व्यक्त किया।

इधर जहां हरियाली का उत्सव मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ ऋषिकेश-देहरादून हाईवे पर सड़क चौड़ीकरण के लिए काटे जा रहे हजारों पेड़ों के विरोध में पर्यावरण प्रेमियों ने आज ‘Black Harela’ अभियान चलाकर सोशल मीडिया और सड़कों पर अपना विरोध दर्ज कराया है।-देहरादून मार्ग के ‘सात मोड़’ क्षेत्र में आज भी विरोध प्रदर्शन लगातार जारी रहा । और आंदोलनकारियों व पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। चूंकि आज पूरे उत्तराखंड में हरेला पर्व मनाया जा रहा है, इसलिए पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय युवाओं ने इस दिन का उपयोग विरोध दर्ज कराने के लिए ‘ब्लैक हरेला’ (Black Harela) के रूप में किया है।आज भूख हड़ताल और धरना (Hunger Strike)अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारी सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ों को कटने से बचाने के लिए कई स्थानीय नागरिक और पर्यावरण कार्यकर्ता शांतिपूर्ण भूख हड़ताल और धरने पर बैठे रहे। प्रदर्शनकारियों ने चिन्हित किए गए पेड़ों के पास डेरा डाला हुआ है ताकि जैसे ही वन निगम की आरी चले, वे चिपको आंदोलन की तरह पेड़ों से लिपट कर अपना विरोध दर्ज कराया। जबरन हटाने और गिरफ्तारी का विरोध और पुलिस की सख्ती के खिलाफ मौके पर मौजूद आंदोलनकारियों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन द्वारा भारी बल का प्रयोग किया जा रहा है। आज अनशन पर बैठे लोगों को पुलिस ने जबरन धरना स्थल से उठाने और हिरासत में लिया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रहा है।मुकदमेबाजी से आक्रोश: पुलिस द्वारा पिछले दो दिनों में उत्तराखंड क्रांति दल (UKD), उत्तराखंड महिला मंच और सामाजिक संगठनों के दर्जनों नामजद व अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज किए जाने से स्थानीय लोगों में गुस्सा और बढ़ गया है।ब्लैक हरेला’ का बढ़ता दायरा काले कपड़े और पटटी पहनकर अपना विरोध जताया । पर्यावरण कार्यकर्ता आज के दिन को एक काले अध्याय के रूप में देख रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब सरकार ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाने का ढोंग कर रही है, उसी समय शटलकॉक (Shivalik) हाथी रिजर्व के सदियों पुराने 4,000 से अधिक कीमती पेड़ों की बलि चढ़ाई जा रही है। इसलिए आज लोग काले कपड़े पहनकर और काली पट्टियाँ बांधकर अपना विरोध जता रहे हैं। आंदोलनकारियों ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर ऋषिकेश और देहरादून के आम नागरिकों से अपील की है कि वे विकास के नाम पर हो रहे इस विनाश के खिलाफ सड़कों पर उतरें और ’10 मिनट पर्यावरण के नाम’ देकर इस लड़ाई में उनका साथ दें।प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और अंतिम फैसले आने तक पेड़ों के कटान को पूरी तरह से स्थगित रखा जाए।
संपादक -गिरिराज उनियाल

