300 खिलाड़ियों पर भारी पड़ा 9 साल का बच्चा, शिवाय बने फीडे रेटिंग चैंपियन, कोरोना ने बना दिया चेस प्लेयर

चैंपियन बनने के बाद प्रयागराज निवासी 9 वर्षीय शिवाय सिंह बोले- इंटरनेशनल लेवल पर भारत का नाम करूंगा रोशन

रुद्रपुर: उधम सिंह नगर के जिला मुख्यालय रुद्रपुर के मनोज सरकार स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित चार दिवसीय प्रथम धीरज सिंह मेमोरियल बिलो-1900 फीडे रेटिंग शतरंज प्रतियोगिता का समापन शानदार मुकाबलों के साथ हुआ. भारत और नेपाल से पहुंचे करीब 300 खिलाड़ियों के बीच उत्तर प्रदेश के प्रयागराज निवासी 9 वर्षीय शिवाय सिंह ने अपनी बेहतरीन रणनीति और शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया. प्रतियोगिता के समापन अवसर पर अपर जिला अधिकारी (प्रशासन) पंकज उपाध्याय ने विजेताओं को सम्मानित करते हुए शिवाय की प्रतिभा की सराहना की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

9 वर्षीय शिवाय सिंह बने धीरज सिंह मेमोरियल फीडे रेटिंग चैंपियन: देवभूमि चेस एसोसिएशन उत्तराखंड के तत्वावधान में मनोज सरकार स्पोर्ट्स स्टेडियम के शिवालिक हॉल में आयोजित चार दिवसीय प्रथम धीरज सिंह मेमोरियल बिलो-1900 फीडे रेटिंग शतरंज प्रतियोगिता ने देश को एक नन्हा चैंपियन दिया. प्रतियोगिता के अंतिम दिन खेले गए निर्णायक राउंड के बाद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज निवासी 9 वर्षीय शिवाय सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया.

प्रतियोगिता में 300 खिलाड़ियों ने लिया भाग: प्रतियोगिता में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ नेपाल से भी कुल लगभग 300 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. चार दिनों तक चली इस प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने अपनी रणनीति, धैर्य और बुद्धिमत्ता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया. हर मुकाबला रोमांच से भरपूर रहा और खिलाड़ियों ने शतरंज की बिसात पर हाथी, घोड़े और ऊंट की शानदार चालों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया.

प्रयागराज के रहने वाले हैं शिवाय सिंह: प्रयागराज के शिवाय सिंह और पंजाब के युवराज सिंह ने नौ राउंड के बाद समान रूप से आठ-आठ अंक अर्जित किए. दोनों खिलाड़ियों के अंक बराबर होने पर फीडे के निर्धारित टाई-ब्रेक नियमों के आधार पर शिवाय सिंह को विजेता घोषित किया गया. वहीं पंजाब के युवराज सिंह उपविजेता रहे. प्रतियोगिता में चंडीगढ़ के दीशांत बंसल ने तीसरा, हरियाणा के कृष्णा कुंडू ने चौथा तथा राजस्थान की आशी उपाध्याय ने पांचवां स्थान प्राप्त किया.

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शिवास के खेल से हर कोई हैरान: समापन समारोह में मुख्य अतिथि अपर जिला अधिकारी (प्रशासन) पंकज उपाध्याय और विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त कर्नल सुभाष सहगल ने विजेताओं को ट्रॉफी और पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया. इस अवसर पर एडीएम पंकज उपाध्याय ने कहा कि-

मात्र 9 वर्ष की उम्र में शिवाय सिंह ने जिस तरह बड़े-बड़े खिलाड़ियों को पीछे छोड़कर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है, वह अपने आप में बेहद प्रेरणादायक और सराहनीय है. इतनी कम उम्र में ऐसी प्रतिभा का प्रदर्शन यह साबित करता है कि यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोशन कर सकते हैं. शिवाय भविष्य में भारत के लिए नई उपलब्धियां हासिल करेंगे.
-पंकज उपाध्याय, एडीएम-

पिता ने बताई बेटे के शतरंज का खिलाड़ी बनने की कहानी: विजेता शिवाय सिंह के पिता रवि प्रकाश सिंह, जो भारतीय रेलवे में कार्यरत हैं, ने बताया कि-

कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा परिवार घर पर था, तभी शिवाय की मां ने उसके साथ शतरंज खेलना शुरू किया. धीरे-धीरे इस खेल में उसकी रुचि बढ़ती गई और उसने लगातार अभ्यास करना शुरू कर दिया. उस समय हमें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि हमारा बेटा इतनी छोटी उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना लेगा और परिवार का नाम रोशन करेगा.
-रवि प्रकाश सिंह, शिवाय के पिता-

चैंपियन बनकर खुश हैं शिवाय: वहीं विजेता शिवाय सिंह ने अपनी सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि-

इससे पहले जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय अंडर-7 प्रतियोगिता (बिलो-1800) में मैं तीसरा स्थान हासिल कर चुका हूं. इस बार प्रथम स्थान प्राप्त करना मेरे लिए बेहद खुशी और गर्व की बात है. मेरा सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना और देश का नाम विश्वभर में रोशन करना है.
-शिवाय सिंह, चेस चैंपियनशिप विजेता-

चौथी कक्षा में पढ़ते हैं शिवाय: गौरतलब है कि शिवाय सिंह वर्तमान में चौथी कक्षा के छात्र हैं और उनकी उम्र मात्र नौ वर्ष है. इतनी छोटी उम्र में फीडे रेटिंग प्रतियोगिता जीतना उनकी असाधारण प्रतिभा का प्रमाण है. इस प्रतियोगिता में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल से भी खिलाड़ी पहुंचे थे, जिससे प्रतियोगिता का स्तर और भी ऊंचा रहा. शिवाय की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि प्रयागराज और उत्तर प्रदेश का भी गौरव बढ़ाया है. उनके शानदार प्रदर्शन की पूरे प्रतियोगिता स्थल पर खूब सराहना हुई और सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

प्रतियोगिता के दौरान देवभूमि चेस एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव संजीव चौधरी, प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ. सीमा सिंह, राकेश ऐरी, इंटरनेशनल आर्बिटर आर.सी. तिवारी, मृत्युंजय सिंह, अवि सिंह, नीरज शाह, रुपेश कुमार और मिताली प्रखर राज सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे.

फीडे क्या है? फीडे शतरंज की सबसे बड़ी इंटरनेशनल बॉडी है. इसका पूरा नाम Fédération Internationale des Échecs यानी अंतर्राष्ट्रीय शतरंज महासंघ है. फ्रांस की राजधानी पेरिस में 20 जुलाई 1924 को फीडे की स्थापना हुई. हालांकि इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड में है. फीडे दुनिया भर में शतरंज के आधिकारिक नियमों को तय और नियंत्रित करता है.

बिलो-1900 फीडे रेटिंग शतरंज प्रतियोगिता क्या है? फीडे से मान्यता प्राप्त बिलो-1900 फीडे रेटिंग शतरंज प्रतियोगिता एक ऐसी आधिकारिक शतरंज प्रतियोगिता है, जिसमें केवल वे ही खिलाड़ी भाग ले सकते हैं जिनकी अंतरराष्ट्रीय फीडे (FIDE) रेटिंग 1900 से कम होती है. इसका मकसद मध्यम और शुरुआती स्तर के खिलाड़ियों को आपस में मुकाबला करने का मंच देना है. इस तरह की प्रतियोगिता से खिलाड़ी अपनी नई रेटिंग हासिल करते हैं.