दान चोरी प्रकरण। सवालों के घेरे में बीकेटीसी, देवस्थानम बोर्ड को लेकर सोशल मीडिया में चर्चा

 

 

 

बद्रीनाथ में चंदा चोरी करते हुए बीकेटीसी का एक कर्मचारी कैमरे में कैद होते ही बीकेटीसी एक बार फिर सवालों के घेरे में है । कुछ दिन पूर्व आरटीआई से बीकेटीसी के द्वारा कैसे लाखों रुपए वीआईपी सुविधा में  खर्च किए जा रहे थे। जिसमें भाजपा विधायक आशा नौटियाल, भाजपा के कैबिनेट मंत्री की बेटी और भाजपा की पदाधिकारी नेहा जोशी एवं नेताओं,अधिकारियों को वीआईपी सुविधा बीकेटीसी के द्वारा मुहैया कराई गई। वो मामला थमा भी नहीं था कि उससे बड़ा मामला दान चोरी का सामने आ गया।

 

हिन्दुओं के पवित्र धाम बद्रीनाथ में दान चोरी प्रकरण में बीकेटीसी का एक कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को दान चोरी करते हुए कैमरे में कैद हुआ।जिसका भैरव सेना ने खुलासा किया।और उसके बाद करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर जो ठेस पहुंची उससे बीकेटीसी और सरकार बैकफुट पर दिखाई दे रही है। हालांकि प्रमोद नौटियाल को पहले निलंबित कर उस नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया गया है । पर अब बीकेटीसी को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं । पहले केदारनाथ में QR कोड  एवं सोना प्रकरण का मामला हो या फिर वीआईपी दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं से लूट खसोट इन सब प्रकरणों से देवभूमि के पवित्र धाम बदनाम हुए। सरकार के तमाम दावे अपनी जगह हैं।पर हर बार अव्यवस्थाओं को लेकर भी श्रद्धालुओं को जो झेलना पड़ता है वो अलग है । बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते । यह एक गंभीर मामला है।और श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है  इसमें और भी दोषी हो सकते हैं इसकी जांच होनी चाहिए। जांच में लीपापोती नहीं होनी चाहिए। पूर्व में इन सब अव्यवस्थाओं को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का गठन किया था । जिसमे चारों धामों के अलावा 47और मंदिरों को इसके दायरे में रखा गया था। इन मंदिरों के प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और विकास के उद्देश्य से यह बोर्ड बना था ।27नवम्बर2019को बोर्ड विधेयक को मंजूरी मिली।  और 5 दिसंबर 2019को ध्वनिमत के साथ यह विधेयक पास हुआ ।14 जनवरी 2020 को राजभवन ने इसे मंजूरी दी। 24फरवरी 2020 को इसमें सीओ की नियुक्ति भी हो गई। उसके बाद चंद पंडा और पुरोहित समाज ने देवस्थानम बोर्ड का यह कहकर विरोध किया कि इससे उनके हक-हकूकधारियों और तीर्थ पुरोहितों ने अपनी पारंपरिक आजीविका और अधिकारों पर सीधा हमला बताया। और पूरा पंडा समाज सड़कों पर उतर गया । बाद में नवम्बर 2021को धामी सरकार ने इस बोर्ड को भंग कर दिया। ये पंडा और पुरोहित समाज के दबाव में लिया गया फैसला था । लेकिन अब चंदा चोरी प्रकरण और‌ अव्यवस्थाओं को लेकर जो मामले सामने आ रहे हैं इससे लगता है कि वहां सामुहिक डकैती हो रही है। ऐसे में एक बार पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उनकी सरकार द्वारा बनाए गये देवस्थानम बोर्ड को सही निर्णय बताया । और कहा कि आज भी वह अपने इस फैसले को सही करार दे रहे हैं। जिससे एक बार फिर पंडा और पुरोहित समाज के निशाने पर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत आ गये हैं पर सोशल मीडिया में रावत सरकार के फैसले को कई  लोग सही ठहराते हुए देवस्थानम बोर्ड को फिर से लागू करने की मांग कर रहे हैं। ताकि चारों धामों की व्यवस्था और रखरखाव सरकार के नियंत्रण में रहे और पारदर्शिता बनी रहे ।